Wednesday, 16 June 2010

बार बार न पूछो की मैं क्या हूँ
मैं दर्द हूँ मुसीबतों में ही पला हूँ

अकेला हूँ, नहीं साथ सिवा मेरी खुदी के
इस हुजूम-ए-इन्सां में अकेला ही खड़ा हूँ

दिल में मेरे खुदा है, हूँ मैं बे ठिकाना
आँखों में समंदर है,मैं दरिया की प्यास हूँ

मैं तुम में ही छिपा हूँ देखो तो आइना
मुझे खुद में खुदी ढूँढ़ो मैं तुम में बसा हूँ

मैं न किस्सा हूँ, न ही कोई ग़ज़ल हूँ
मुझे पढ़ के खुद को पढ़ मैं किताब खुला हूँ

क्या अर्ज़ करूं दोस्त, क्या हूँ मैं "कादर"
लम्बे से सफ़र का एक छोटा सा सिरा हूँ

केदारनाथ "कादर"
kedarrcftkj.blogspot.com

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