Friday, 11 June 2010

नारी और जीवन के बदलाव

जीवन तो बहती नदिया है, जीवन को समय से मत बांधो
बहने दो जीवन को अपनी हर साँस और मुस्कुराहट से

किसी के लिए एक मुस्कुराहट भी है कीमती जीवन से
और कोई मुस्कुराहटों को मार कर सोचता है जीत गए

लेकिन नारी न कभी हारी वह अनंत की है हमसफर
एक जीवन नहीं कई जीवनों को सहेजती अपनी सांसो से

नारी है जीवन सरिता सी , धूप छांव सा जीवन जीती
मायने कैसे भी हों "कादर" सब ही जाने जाते नारी से


केदार नाथ "कादर"
http://kedarrcftkj.blogspot.com

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