मुझे आवाज नहीं देता, कोई नहीं बुलाता
जाने मगर किधर को मेरा दिल है जाता
मैं देखूं जिधर भी, आंसू और उदास चेहरे
ऐसा हर एक मंजर मुझको ही है बुलाता
दौलत नहीं है हासिल न ही कोई इल्म है
ग़मगीन दिल से मेरे , है ग़मों का नाता
क्या दीन है धरम है, क्या नाम है तुम्हारा
मुफलिस हर एक भाई, मेरी ही माँ का जाया
कमजोर ओ बेबस मुझे लगता है मेरा साया
मेरे लिए खुदा वो, जिसने रोते हुओं को हंसाया
इन्सान खोजता हूँ, आदमियों के जंगल में
"कादर" मुश्किल से मैंने अपना पता है पाया
केदारनाथ "कादर"
Friday, 11 June 2010
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