Friday, 12 April 2013

नव संवत 2070 ,चैत्र प्रतिपदा की शुभकामनाएं। आप सभी को सपरिवार मंगलमय हो।


नव संवत 2070 ,चैत्र प्रतिपदा की शुभकामनाएं। आप सभी को सपरिवार मंगलमय हो। 
अंग्रेजी का नव वर्ष भले हो मनाया,
उमंग उत्साह चाहे हो जितना दिखाया;
विक्रमी संवत बढ़ चढ़ के मनाएं,
चैत्र के नवरात्रे जब जब आयें।
घर घर सजाएँ उमंग के दीपक जलाएं;
खुशियों से ब्रहमांड तक को महकाएं।
यह केवल एक कैलेंडर नहीं, प्रकृति से सम्बन्ध है;
इसी दिन हुआ सृष्टि का आरंभ है। 
 तदनुसार 11 अप्रेल 2013, इस धरा की 1955885113वीं वर्षगांठ तथा इसी दिन सृष्टि का शुभारंभ हुआ. आज के दिन की प्रतिष्ठा ?
1.भगवान राम का राज्याभिषेक. 2.युधिस्ठिर संबत का आरंभ 3 .बिक्रमादित्य का दिग्विजय. 4.बासंतिक नवरात्र का आरंभ 5 .शिवाजी महाराज की राज्याभिषेक.6 .राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवर जी का जन्मदिन. 
ईश्वर हम सबको ऐसी इच्छा शक्ति प्रदान करे जिससे हम अखंड माँ भारती को जगदम्बा का स्वरुप प्रदान करे। धरती मां पर छाये वैश्विक ताप रुपी दानव को परास्त करे... और सनातन धर्म का कल्याण हो।..
युगदर्पण परिवार की ओर से अखिल विश्व में फैले हिन्दू समाज सहित,चरअचर सभी के लिए गुडी पडवा, उगादी,
नव संवत 2070 ,चैत्र प्रतिपदा की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं
जय भबानी, जय श्री राम, भारत माता की जय(विलम्ब ले लिए खेद है, 2 दिन से सर्वर बंद था।)
नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्प - (विविध विषयों के 28 ब्लाग, 5 चेनल  अन्य सूत्र) की 60 से अधिक देशों में एक वैश्विक पहचान है। आप चाहें तो आप भी इस सोच  संघर्ष के साथी बन सकते हैं, इसके समर्थक, योगदानकर्ता, प्रचारक,  Be a member -Supporter, contributor, promotional Team, तिलक -संपादक युगदर्पण मीडिया समूह YDMS. 9911111611, 9999777358, 9911383670. yugdarpan.com ,
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पत्रकारिता व्यवसाय नहीं एक मिशन है| -युगदर्पण

Monday, 18 March 2013

नौजवान

नौजवानों ने अज़ब सा देखो उजाला कर दिया


सूखे दीयों में तेल उम्मीद का दुबारा भर दिया



जिन घरों में पसरा था मातम का साया ग़ज़ब

अपनी हिम्मत से हँसी का एक पौधा धर दिया



अब जमाना मेहनत का है सबको सिखाया यही

नौजवाँ इस सोच ने सब कुछ निराला कर दिया



अब समझ आई है आजादी सुभाष आजाद की

हारी हुई हर सोच को हमने हिमाला कर दिया



मंदिर-ओ-मस्जिद का नहीं अब कोई झगडा बचा

जमजम-ओ-गंगाजल हमने एक प्याला कर दिया



हम हैं कायल शान्ति के पर न खद्दर पर यकीन

झूठ के दरिया को अब हमने नाला कर दिया



अब न कोई लूट पाए अपनी मेहनत का धन

अपना मुकद्दर "कादर" हाथों के हवाले कर दिया



केदारनाथ "कादर"



रहनुमा

अब रहनुमा से न दरकार रख, खुद रहनुमा बन यार तू


ये चमन तेरा है याद रख, "कादर" जान से कर प्यार तू



Nar Pishach

आदर्शों की खाल है, नजर उठाकर देखिये जिस ओर भी


"कादर" उघाड़ना मत खाल , नरों में नरपिशाच छिपे हैं



Saturday, 5 January 2013

स्वामी विवेकानन्द महान।


स्वामी विवेकानन्द महान।
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पैदा हुए थे जिस धरती पर, स्वामी विवेकानन्द महान।जिसका यश गाता रहा ये जहान, है मेरा प्यारा हिन्दोस्तान।
ये मेरा प्यारा देश महान, जन्मे स्वामी विवेकानन्द महान।
*देवी देवता, ऋषि मुनि, व महापुरुषों की कर्मस्थली यह।
ज्ञान विज्ञान, विश्व बंधुत्व, प्रेम शौर्य, मानवीय धर्मक्षेत्र है।
मानव ही नहीं जीव जंतु, व पर्यावरण समन्वय का दे ज्ञान।
इसीलिए था विश्वगुरु, तब इस पर क्यों न करें अभिमान ? 
*ग्रहण लगा था विश्वगुरु को, और मानवता जब थी बन्दी। 
आतताइयों के कृत्यों से जब यह धरा हुई सारी थी गन्दी।
1863 में भारत में जन्मे, राज था अंधकार का व फैला अज्ञान
जब ज्ञान खोजता विश्व था, शिकागो में तब कराई पहचान।
*जब राजा ही करे व्याभिचार, तो जनता हो जाती लाचार।
पहला बन्दर सोता रहता है, देश का दर्द न दूजा सुनता है।
मौनी बाबा सत्य  कहता, आश्वासन के पाखंड दिखाता है। 
तभी हैं ऐसे दुरदिन ये आये, कि सारा देश हुआ परेशान। 
*आओ फिरसे बनाये देश महान, जिसका यश गाये सारा जहान।
हम सोने की चिड़िया ऐसी बनायें, जहाँ कोई न हो परेशान। 
आने वाला कल चमकाने में, हम आज कर जायेंगे बलिदान। 
मेरा भारत, सदा रहा है महानये मेरा प्यारा देश महान,...
जिसका यश गाता रहा ये जहान, है मेरा प्यारा हिन्दोस्तान।
पैदा हुए थे जिस धरती पर, स्वामी विवेकानन्द महान।
है मेरा प्यारा हिन्दोस्तान,  ये मेरा प्यारा देश महान,...
है मेरा प्यारा हिन्दोस्तान,  ये मेरा प्यारा देश महान,...
"अंधेरों के जंगल में, दिया मैंने जलाया है | इक दिया, तुम भी जलादो; अँधेरे मिट ही जायेंगे ||"  युगदर्पण

Saturday, 10 November 2012

सार्थक दीपावली सन्देश

सार्थक दीपावली सन्देश: సార్థక దీపావలీ సన్దేశ , ஸார்தக தீபாவலீ ஸந்தேஸ , ಸಾರ್ಥಕ ದೀಪಾವಲೀ ಸನ್ದೇಶ , സാര്ഥക ദീപാവലീ സന്ദേശ ,সার্থক দীপাবলী সন্দেশ, 

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युगदर्पण का सार्थक दीपावली सन्देश: सार्थक दिपावली का अर्थ ? 
सार्थक दीपावली सन्देश...Pl. Like it, join it, share it. Tag 50 
युगदर्पण का सार्थक दीपावली सन्देश: सार्थक दिपावली का अर्थ ? 
दशहरा यदि सत्य का असत्य पर विजय का प्रतीक है, तो दीपावली प्रकाश का अन्धकार पर। आइयें, इस के लिये संकल्प लें: भ्रम के जाल को तोड़, अज्ञान के अंधकार को मिटा कर, ज्ञान का प्रकाश फेलाएं। आइये, शर्मनिरपेक्ष मैकालेवादी बिकाऊ मीडिया द्वारा समाज को भटकने से रोकें; जागते रहो, जगाते रहो।। 
यह दीपावली भारतीय जीवन से आतंकवाद, अवसरवाद, महंगाई, भ्रष्टाचार आदि की अमावस में, सत्य का दीपक जला कर धर्म व सत्य का प्रकाश फैलाये तथा भारत को सोने की चिड़िया का खोया वैभव, पुन:प्राप्त हो! अखिल विश्व में फैले सम्पूर्ण हिन्दू समाज के आप सभी को सपरिवार, युगदर्पण परिवार की ओर से दीपावली की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं। 
पत्रकारिता व्यवसाय नहीं एक मिशन है -इस देश को लुटने से बचाने तथा बिकाऊ मेकालेवादी, मीडिया का एक मात्र सार्थक, व्यापक, विकल्प -राष्ट्र वादी मीडिया |अँधेरे के साम्राज्य से बाहर का एक मार्ग...remain connected to -युगदर्पण मीडिया समूह YDMS. तिलक रेलन 9911111611 ... yugdarpan.com

दशहरा यदि सत्य का असत्य पर विजय का प्रतीक है, तो दीपावली प्रकाश का अन्धकार पर। आइयें, इस के लिये संकल्प लें: भ्रम के जाल को तोड़, अज्ञान के अंधकार को मिटा कर, ज्ञान का प्रकाश फेलाएं। आइये, शर्मनिरपेक्ष मैकालेवादी बिकाऊ मीडिया द्वारा समाज को भटकने से रोकें; जागते रहो, जगाते रहो।।
यह दीपावली भारतीय जीवन से आतंकवाद, अवसरवाद, महंगाई, भ्रष्टाचार आदि की अमावस में, सत्य का दीपक जला कर धर्म व सत्य का प्रकाश फैलाये तथा भारत को सोने की चिड़िया का खोया वैभव, पुन:प्राप्त हो! अखिल विश्व में फैले सम्पूर्ण हिन्दू समाज के आप सभी को सपरिवार, युगदर्पण परिवार की ओर से दीपावली की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं।
पत्रकारिता व्यवसाय नहीं एक मिशन है -इस देश को लुटने से बचाने तथा बिकाऊ मेकालेवादी, मीडिया का एक मात्र सार्थक, व्यापक, विकल्प -राष्ट्र वादी मीडिया |अँधेरे के साम्राज्य से बाहर का एक मार्ग...remain connected to -युगदर्पण मीडिया समूह YDMS. तिलक रेलन 9911111611 ... yugdarpan.com

Wednesday, 5 September 2012

मैं भारत हूँ!!

मैं भारत हूँ!! (हमारी प्रकृति व नियति)
रोक न पाए, जिसको ये विश्व सारा,
वो एक बूँद, आँख का पानी हूँ मैं,
यदि रख सको, तो अमिट निशानी हूँ मैं,
न संभाल सको, तो बस एक कहानी हूँ मैं,
उन शर्मनिर्पेक्षों से पूछो, क्या हमको सिखाते?
तुम्हें छोड़ सब जानते, क्या है संस्कृति हमारी;
वसुधैव कुटुम्बकम की प्रकृति है हमारी,
विश्वगुरु फिर कहाने की नियति है हमारी,
समझो खुली किताब के जैसी कहानी हूँ मैं,
यदि रख सको, तो अमिट निशानी हूँ मैं,
न संभाल सको, तो बस एक कहानी हूँ मैं,
कितना भी गहरा घाव दे कोई हमको,
उतना ही मुस्करान भी आता है हमको,
अतिथियों का स्वागत किया है सदा ही,
शत्रुओं को मिटाना भी आता है हमको;
ये शब्द नहीं इतिहास की जुबानी हूँ मैं;
यदि रख सको, तो अमिट निशानी हूँ मैं,
न संभाल सको, तो बस एक कहानी हूँ मैं,
खोलना चाहते हो क्यों, बंद उस द्वार को?
द्वार मस्तिष्क खोलो, न रहो आंख मीचे,
वरना रह जायेगा, केवल पछताना पीछे,
धधकता है ज्वालामुखी, बड़ा जिसके पीछे,
राम का भक्त हनुमान जैसी रवानी हूँ मैं;
"यदि रख सको, तो अमिट निशानी हूँ मैं,
न संभाल सको, तो बस एक कहानी हूँ मैं".

देश केवल भूमि का एक टुकड़ा नहीं !
देश की मिटटी की सुगंध, भारतचौपाल!
पत्रकारिता व्यवसाय नहीं एक मिशन है-युगदर्पण