Wednesday, 16 May 2012


17, मई 2012 आज 17 वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धा सुमन 
माँ, जो गर्भ से मृत्यु तक, हर पल अपने बच्चों के हर दुःख सुख की साथी, जिसकी गोद हर पीड़ा का हरण करती है। बचपन ही नहीं वृद्धावस्था व् जीवन के अंत तक हर पल जब भी तुझे स्मरण करता हूँ भाव विहल हो जाता हूँ। माँ, तेरी याद बहुत आती है, ....माँ, तेरी याद बहुत आती है।
माँ, इन 2 वर्षों में दामाद और बहु भी हो गए हैं शीघ्र ही अगली पीडी भी हो जाएगी। दामाद- सिद्धार्थ है, तथा बहू शालिमा है। तिलक- संपादक युग दर्पण मीडिया समूह, 9911111611, 9654675533.

Sunday, 22 April 2012

बहुत सी रचनायें  हमने मंच पर साँझा की, जो हमारे समाज पर आधारित थी . हमने जयादातर रचनाओं में महिला की दशा का वर्णन किया  ...उस पर होते अत्याचार पर चर्चा की. वे हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं..ठीक वैसे ही जैसे की पुरुष है . आज उसी पुरुष के नजरिये  एक  रचना आप सभी सुधि जनों को समर्पित करता हूँ...आप का समर्थन चाहूँगा  :-

किसी ने नहीं देखा है कभी
मर्द का चिल्लाता हुआ दर्द
वह  सहमा सा ही रहता है
एक पूँछ लगे हुए कुत्ते सा
अपनी ही  टाँगों के बीच में
हर एक उसका रिश्ता यहाँ
करता है उसपे तीखा वार
बनकर जैसे तेज़ धार तलवार 


वह अक्सर बहुत सहता है
और सहमता है वह खुद ही
होने पे अपने मर्द का दर्जा
बनता है  रोज़ ही शिकार
वह कभी बहन के हक से
वह कभी माँ के प्यार से
कोरे अधिकार से पत्नी के 
कभी बच्चों के ख्वाव से


रहता है  निरीह जानवर सा
वह सदा स्नेह का भिक्षुक 
जीता एक अनचाही जिंदगी
अकेला वह होते हुए शिकार
अक्सर ही तन और मन पे
वह झेलता है रोज़ कितने बाण
फिर भी कहते हैं लोग यही
मर्द को दर्द होता  ही नहीं

अक्सर मंचों से मैं सुनता हूँ
महिला होने के अभिशाप का प्रलाप  
जो मारता दबाता है पुरुष को
जो ठहराता है दबंग और दानव
जबकि सच तो ये भी है कि
परुष पग पग छला जाता है
पुरुष ही नहीं बनाता शिकार
उसका भी शिकार किया जाता है


केदारनाथ "कादर"

Wednesday, 31 August 2011

आज का सत्य व धर्म युद्ध !

आज का सत्य व धर्म युद्ध !
हम उधर हाथ बढ़ाते हैं,
जिसे पाना सरल हो,
फिर चाहे वो गरल हो,
हमारी आकांक्षा रहती है
वही पाने की,
जिसे पाना सरल नहीं होता;
क्योंकि जो सहज सुलभ होता है
वह विनीत होता है;
वह आकांक्षा नहीं जगाता,
विनय को कौन सुनता है
शक्ति की सदा पूजा होती है,
चाहे वो शक्ति सत्ता की हो,
भुज बल, धन बल अथवा हो जन बल की,
जब सत्ता निरंकुश हो जाये अधर्म कहलाता है,
उस पर अंकुश धर्म,
सत्ता उस अंकुश को माने तो धर्म सत्ता,
न माने तो
धर्म व न्याय की रक्षा में होता है
धर्म युद्ध.
- तिलक, संपादक युग दर्पण 9911111611

Saturday, 6 August 2011

youtube/Desh bhakti ke Geet (8) & facebook Link.


स्वतंतरता दिवस के शुभ अवसर पर "देश  भक्ति  के  गीत" गाने, सुनने, अथवा गुनगुनाने का मन करे तो 
http://www.youtube.com/user/DoorDarpan/Desh bhakti ke Geet (8) देश  भक्ति  के  गीत - तिलक संपादक युग दर्पण 09911111611.

Tilak raj relan is available on Face Book,http://www.facebook.com/people/Tilak-Relan/100002369147267
https://www.facebook.com/profile.php?id=100002369147267

Monday, 11 April 2011

श्री राम नवमी की कोटि कोटि हिदू समाज सहित आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं.....


श्री राम नवमी की कोटि कोटि हिदू समाज सहित आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं.....
तिलक राज रेलन,  संपादक युग दर्पण , 09911111611

Saturday, 2 April 2011

नव संवत 2068 की शुभकामनाएं।

अंग्रेजी का नव वर्ष भले हो मनाया,
उमंग उत्साह चाहे हो जितना दिखाया;
विक्रमी संवत बढ़ चढ़ के मनाएं,
चैत्र के नवरात्रे जब जब आयें
घर घर सजाएँ उमंग के दीपक जलाएं;
खुशियों से ब्रहमांड तक को महकाएं
यह केवल एक कैलेंडर नहीं, प्रकृति से सम्बन्ध है;
इसी दिन हुआ सृष्टि का आरंभ है

तदनुसार 4 अप्रैल 2011, इस धरा की 1955885112वीं वर्षगांठ तथा इसी दिन सृष्टि का शुभारंभ हुआ.आज के दिन का महात्य -
1.भगवन राम का राज्याभिषेक. 2.युधिस्ठिर संबत की शुरूवात.3 .बिक्रमादित्य का दिग्विजय. 4.बासंतिक नवरात्र की शुरूवात.5 .शिवाजी महाराज की राज्याभिषेक.6 .राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवर जी का जन्मदिन. 
ईश्वर हम सबको ऐसी इच्छा शक्ति प्रदान करे जिससे हम अखंड माँ भारती को जगदम्बा का स्वरुप प्रदान करे, धरती मां पर छाये वैश्विक ताप रुपी दानव को परास्त करे... और सनातन धर्म का कल्याण हो..
युगदर्पण परिवार की ओर से अखिल विश्व में फैले हिन्दू समाज सहित,चरअचर सभी के लिए गुडी पडवा, उगादी,
नव संवत 2068 की शुभकामनाएं
जय भबानी ,जय श्री राम,भारत माता की जय.
तिलक संपादक युगदर्पण. .
(निस्संकोच ब्लॉग पर टिप्पणी/अनुसरण/निशुल्क सदस्यता व yugdarpanh पर इमेल/चैट करें संपर्कसूत्र-09911111611,9911145678,9540007993. www.deshkimitti.feedcluster.com/ http://www.deshkimitti.blogspot.com/

Monday, 24 January 2011

मेरा परिचय


मेरा परिचय
मेरी कविता शर्मनिरपेक्षता पढ़ कर मेरा परिचय है पूछा जाता ;
लो इसीलिए अपना परिचय मैं आज तुम्हे बतलाता हूँ !
मैं दिनकर तो नहीं (किन्तु) दिनकर की दिनकरता का वारिस तो हूँ ;
तथा राष्ट्रवाद के अकालग्रस्त खेतों में बारिश सा तो हूँ ;
नभ से धरती के पृष्ठों पर, राष्ट्र भक्ति की कलम उठा ;
अपने अंतर की ज्वाला से अंगारों को शब्दों में ढाल;
नव क्रांति की कविता रच कर; मैं नाम तुम्हारे कर दूंगा!
ऐसे फिर भारत का सोया, मैं भाग्य बदल कर रख दूंगा!!
ऐसे फिर भारत का सोया, मैं भाग्य बदल कर रख दूंगा!!
मैं दिनकर तो नहीं....
मैं वो भांड / भाट नहीं जो पुरुस्कार हित, सत्ता के चरण चुम्बन में शीश नंवाते;
मैं वो पत्ता भी नहीं जो मंद पवन के झोंके से ही उड़ जाते;
हिमालय की दृढ़ता का प्रतीक हूँ, तूफान बवंडर भी हैं मुड जाते;
बनूँ भगत आजाद उधम सिंह सावरकर तो बैरी भी हैं थर्रा जाते;
भूले से तुम टकरा मत जाना, और घर में जा के मौज मनाना;
पीठ पे वार नहीं करते हम, जब भी शत्रु रण छोड़ के जाते ? 
मैं दिनकर तो नहीं (किन्तु) दिनकर की दिनकरता का वारिस तो हूँ